घर में माँ , 2 बेटे और शर्माजी के पिताजी रामलाल रहते थे
शर्माजी सऊदी में नौकरी करते थे और कभी कभी ही घर आ पते थे
दोनों बेटे , सोनू और विक्की उम्र 18 और 20 साल कॉलेज में पढ़ रहे थे
मधु की उम्र 46 साल ,वो घर के काम में ही मसरूफ रहती थी
मधु के ससुर रामलाल जी अपने समय के माने हुए पहलवान थे
उनके बीवी के गुजरजाने के बाद उन्हें बहुत धक्का लगा
और वो अपने ही कमरे में रह कर गीता पाठ किया करते .
पिता के घर में ना होने की वजह से सोनू , विक्की थोड़े बिगड़ गए थे
कॉलेज के बाद आवारा दोस्तों के साथ मटरगस्ती और शाम को घर देर से आना
इन सब चीज़ो के चलते मधु को बच्चो पर थोड़ा सख्ती दिखानी पड़ती थी
बार बार उनको कॉलेज के प्रोग्रेस के बारे में पूछना , घर देर से आने पर
कभी कभी डाट और कभी मार भी पड़ती थी |
पैसे की गड़बड़ी पर तो माँ आग बबूला हो जाती थी , दोनों मम्मी से काफी डरते थे
और सर झुका कर सब बात मान लेते थे | पर जवान लड़के कहा बंधन में रहते हैं ,
हमेशा कुछ न कुछ बदमाशी दिखा ही जाते थे .
मधु - क्यों रे ! सब्जी लेने गया था और 4 घंटे बाद लौट रहा है ??
सोनू - वो मम्मी ...बहुत भीड़ थी सब्जी वाले के पास तो थोड़ा टाइम लग गया
मधु - [कान मरोड़ कर ] झूठ मत बोल ! सब जानती हु में ...गया होगा अपने उस
आवारा दोस्त असलम के पास
सोनू - आईईई .....सससससस मम्मी ....सॉरी सॉरी !
मधु - चल अब जेक किचन साफ़ कर दे , मुझे खाना बनाना है
शर्मा जी कभी 6 महीने कभी 1 साल में कुछ ही दिन के लिया घर आते थे .
उसी में मधु को संतुस्ट होना पड़ता था प्यार की कमी मधु को भी बहुत खलने लगी थी ,
बेचारी वो अपना गुस्सा ऐसे ही बच्चो को मार पीट के निकाल देती थी .
मधु दिखने में बड़ी ही हस्ट-पुस्ट औरत थी , भरी भरकम स्तन
heavy नितम्ब , लम्बे घने बाल और दूध जैसी गोरी . वक्षो का वजन
इतना था की जब मधु चलती थी तो स्तन सीने पे इधर उधर हिलते डुलते
रहते थे , यही हाल नितम्बो का था .
मधु - बाबूजी आपके लिया चाय ले आऊ ?
रामलाल - हाँ बहु , थोड़े देर में दे देना में जरा नाहा धो लेता हु
दोनों बच्चे कही दिखाई नहीं दे रहे
मधु - जी वो आज दोनों का फूटबाल मैच है तो स्टेडियम गए हुए हैं
रामलाल - आजकल लड़के बहुत घर से बहार रहने लगे हैं बहु
जरा सम्भालो दोनों को कही हाथ से निकल ना जाये
मधु - जी , कोशिश तो करती हु पर आदमी की बात अलग ही होती है
वो अगर घर रहते तो थोड़ा और कण्ट्रोल होता
रामलाल - हाँ , वो तो है . तुम्हे पता है मेरे दोस्त सुरेश की बहु को लड़का हुआ
मधु - अच्छा , वाह ये तो काफी सुखद समाचार है . बाबूजी सुरेश जी के
बेटे भी इनके साथ दुबई में ही काम करते हैं ना ?
रामलाल - हाँ बहु वही सुरेश , बेचारा आजकल जोड़ो के दर्द से परेशान है .
मधु - बाबूजी वो तो आपके साथ ही पहलवानी करते थे ना .
रामलाल - हाँ बहु , वो भी क्या दिन थे लंगोट पेहेन के मिटटी से साने बदन
सामने वाले को अपने जांघो के बीच ही चित कर देता था
मधु - [ससससस ...हाय क्या मंज़र होता होगा ...छीछी में ये क्या सोचने लगी ]
ओह्हू बाबूजी अभी भी क्या बिगड़ा है , आप फिरसे मैदान में उतर सकते हैं
रामलाल - अरे बहु अब शरीर में इतनी ताकत नहीं बची की पहलवानी करु
मधु - आप चिंता मत करो बाबूजी में आपको रोज छुवारे वाला दूध देती हु
कुछ ही दिनों में आप फिरसे फिट हो जाओगे
रामलाल - सच कह रहे हो बहु , कल से में भी कुछ कसरत वागहरा शुरू करता हु
मधु - हां , ये ठीक रहेगा . में अब किचन जाती हु , दोनों नालायक आगये तो
आते ही खाना मांगेंगे
रामलाल - हाँ बहु जाओ , में भी अब नाहा लेता हु
मधु रानी मटकती हुयी किचन में चली जाती है , उधर रामलाल बहु की
नाचते हुए कूल्हे देखने का मौका नहीं छोडाता , फिर हलके से अपने लुंड को लुंगी
पर से सेहलते हुए बाथरूम चला जाता है
कुछ देर बाद सोनू घर आ जाता है और मम्मी मम्मी करते हुए सीधा किचन में घुस जाता है
मधु - अरे क्या हुआ ?....क्यों चिल्ला रहा है ??
सोनू - आआह ....अह्ह्ह्ह
मधु - [घबराकर उसे देखती है ] क्या हुआ बीटा क्यों करहा रहा है
कही चोट वोट तो नहीं लगी
सोनू - अह्ह्ह्ह ....हां मम्मी ...घुटनो में बुरी तरह से ....अह्ह्ह
वो भैया ने किक मारी तो में ग्रास पे स्लिप हो गया और पोल से टकरा गया
मधु - ओफ्फो ...चल चल ...चेयर पे बैठ जा आराम से मुझे देखने दे .
मधु अपने कंधे का सहारा देके उसे चेयर पे बिठा देती है
फिर निचे बैठ कर उसके शॉर्ट्स को घुटनो तक ऊपर करके मुआयना करने लगती है
अपने पल्लू का उसे ध्यान नहीं रहा जो निचे सरक गया था और क्लीवेज सोनू के सामने
नंगा हो गया था , सोनू का ध्यान अपने आप मधु के बड़े स्तनों की तरफ चला गया
और वो अपना दर्द भूल के माँ के विशाल स्तनों को घूरने में मगन हो गया
मधु - ओह्ह्ह ...थोड़ा छिल गया है , में घुटना दबा के देखती हु बताना कहा दर्द हो रहा है
जब सोनू का जवाब नै आया तो मधु ने ऊपर देखा तो सोनू की नजरे उसके सीने पर गाड़ी हुए थी
सहँसा ही मधु को आभास हुआ की उसका पल्लू सरक गया है , मधु ने तुरंत पल्लू सही किया
मधु - [गुस्से में ] में तुजसे तेरी चोट का पूछ रही हु और पता नहीं तेरा ध्यान कहाँ है
सोनू - हां ...हाँ मम्मी ...वहां बहुत दर्द है ...आआअह्ह्ह
मधु - [ये लड़के दिन ब दिन बहुत ही बिगड़ते जा रहे हैं ] अच्छा रुक में डेटोल लेके आती हु
मधु ने सोनू का जखम साफ़ किया और घुटने पर पट्टी लगा दी फिर उसे सहारा देके बैडरूम में
ले जाकर बैड पर लिटा दिया
मधु - तू अब थोड़े देर आराम कर ले , में किचन में जा कर खाना बना लेती हु ,
तेरा बड़ा भाई भी आता होगा
सोनू - ठीक है मम्मी , मुझे आज खाने में सिर्फ दाल चावल बना दो .
मधु - जो हुकुम राजा जी , दाल चावल भी बना दूंगी
कहते हुए मधु किचन में चली जाती है , सोनू ने भी माँ के झूलते हुए नितम्बो को
देखने का मजा नहीं छोरा और जब तक माँ आँखों से ओझल ना हो गयी सोनू की आँखे
उसके नितम्बो पर गाड़ी रही .
इधर रामलाल भी नाहा धो कर खाने की टेबल पर आके बैठ गया और मधु को काम करते हुए
पीछे से निहारने लगा , मधु की ब्रा का कुछ भाग पीछे ब्लाउज से निकला हुआ था
रामलाल का मन वहा ही जाके टिक गया , उसकी मोती चोटी काम करते हुए काले नाग की तरह
गांड के ऊपर लहरा रहे थी , कूल्हे हमेशा की तरह इधर उधर डोल रहे थे .
रामलाल चुप बैठा घूरे ही जा रहा था , की कुछ ही देर में मधु पलटी और रामलाल को बैठा पाया
मधु - अरे बाबूजी आपने नाहा लिया , मैंने तो सोचा आपको देर लगेगी . बोलिया खाना लगा दू ?
रामलाल - आ...हां बहु लगा दो , अब खाना खा के जल्दी सो जाऊंगा . दोनों बच्चे आगये स्टेडियम से ?
मधु - हाँ सोनू आगया है , पता नहीं कहा से चोट लगवा लाया , मैंने अभी पट्टी करके बैडरूम में लिटा दिया है
रामलाल - अच्छा ...सोनू ठीक तो है ना ज़्यादा तो नहीं लगी उसे ?
मधु - हाँ थोड़ा घुटने पर घाव है ...शायद 2-3 दिन में ठीक हो जायेगा
रामलाल - तुम भी साथ ही अपना खाना खा लो बहु , कहा देर रात को खाऔगी
मधु - जी बाबूजी में भी अपनी प्लेट लगा लेती हु , बस सबके लिया रोटी बना दू
रामलाल का मन बहु को नजदीक से देखने का था , पास बैठी तो उसके पूरे बदन को अच्छे से निहार पता
कुछ मिनट में मधु ने रामलाल को खाना परोसा और खुद भी बगल की कुर्सी पर खाना लेके बैठ गयी
मधु को खाने का बड़ा चाव था , नए नए चीज़े बना के वो दुसरो को खिलाती और खुद भी खाती
शायद इसलिए ही उसका बदन काफी तंदुरुस्त था . मधु रोज की तरह अपने खाने में मगन हो गयी
इधर रामलाल उसके मागंता का फायदा उठा कर उसके विशाल स्तनों की गोलाई मापने लगा
कभी हिलते डुलते उसको अंदर की गहराई के दर्शन भी हो जाते . मस्ती के हलके हलके झोके लेके
रामलाल अपना खाना खा रहा था . मधु ने सहसा ही रामलाल को खाते हुए पूछने लगी
मधु - बाबूजी जब आप कुश्ती लड़ते थे तो आपने कितने पहलवानो को मत दी थी
रामलाल - [एकदम से हुए इस सवाल से रामलाल थोड़ा ठिठक गया , जबकि वो उसकी गहराई मापने में मगन था ]
बहु कभी मैंने गिनती नहीं की पर मेरे चर्चे पूरे जिले में मशहूर थे | दूर दूर से लोग मेरे
कुश्ती देखने आते थे
मधु - वाह बाबूजी , मतलब आप बहुत famous थे , काश में भी आपकी कुश्ती देख पाती
रामलाल - हा हा ...हां हां किसी दिन तुम्हें भी अखाड़े ले चलूँगा ...अभी भी एक दो दाव् पेच तो याद ही हैं मुझे
मधु - बाबूजी मुझे लगता है मुझे भी थोड़ा लड़ने की कला आनी चाहीये , क्युकी अकेली औरत बहुत
बेबस हो जाती है . कभी जरुरत पड़ी तो आत्मरक्षा के लिया कुछ तो आना चाहीये
रामलाल - हाँ बेटी क्यों नहीं , बिलकुल सही कहा
मधु - बाबूजी कभी आपने इनको कुश्ती के बारे में नहीं सिखाया . ये तो हमेशा सिर्फ कमरे में लुंग-पुंज
से पड़े रहते हैं .
रामलाल - [अपने बेटे के बारे में बोलते हुए ] उसका मन कभी खेल कूद में लगा ही नहीं कभी , हमेशा बस एक पढ़ाकू
बच्चा बना रहा . मैंने कई बार कोशिश की पर बड़ा ही आलसी था किशोर
मधु - [हाँ ...वो तो है बैडरूम में आलस दीखता था उनका ] हम्म्म्म ..
रामलाल - बहु कल में तुम कुश्ती के कुछ गुर सिखाऊंगा , ताकि तुम अपनी आत्म रक्षा कर सको
मधु - [excited होकर ] जी बाबूजी
रामलाल - ये मोती क्या काये काये कर रहा है सुबह से , उसको रोटी नहीं डाली क्या
मधु - पता नहीं बाबूजी ये कुत्ता भी अपने ही मूड में रहता है . सुबह ही दूध रोटी दी थी मैंने .
खाना खा कर रामलाल अपने कमरे में और मधु बैडरूम में चले जाते हैं
मधु विक्की के लिया टेबल पर खाना रख देती है |
मधु - क्यु रे , अब कैसी तबियत है . दर्द कुछ काम हुआ ?
सोनू - [ नींद में ही बडबडाने लगा ] ऊऊओ नै करना मुझे होमवर्क ...जाओ यहाँ से मम्मी
मधु - अरे क्या बोल रहा है , अभी भी नींद में है क्या ? चल सो जा सुबह कुछ ठीक लगेगा
बैडरूम में आमतौर पर मधु ही सोती थी पर चुकी सोनू को चोट लगी थी तो उसने उसे अपने साथ
सुलाना सही लगा | बगल में जाके मधु भी लेट गयी और आँख मूँद कर सोने की कोशिश करने लगी
रात को सोनू कराहने लगा तो महू की सहसा ही आँख खुल गयी |
सोनू - आआह ...आआह्ह्ह
मधु - ऊऊओ ...का का ..क्या हुआ बेटा ? [मधु ने सर पर हाथ फेरते हुए पूछा ]
सोनू - मम्मी ....मम्मी ....बहुत दर्द हो रहा है घुटने में पेअर हिल भी नहीं रहा और मुझे सुसु आयी है |
मधु - थोड़ा कोशिश कर बेटा बाथरूम ज़्यादा दूर नहीं है | चल में सहारा दे देती हु |
सोनू - आआह मम्मी .. पैर हिल भी नहीं रहा मम्मी | में कही भी नहीं जा सकता | लगता है पेंट में ही निकल जाएगी
मधु - उफ्फ्फ ....ना ना पेट में मत कर , रुक में कुछ लाती हु
मधु किचन में से एक प्लास्टिक की बॉटल ले आयी
मधु - ले इसमें कर ले बाद में इसको फेक देना
सोनू - कैसे करूँगा मम्मी बॉटल में कैसे होगा
मधु - कोशिश तो कर बेटा , हो जायेगा
सोनू अपने शॉर्ट्स के अंदर बॉटल को घुसेड़ लेता है और अपने लुंड को बॉटल के मुँह में लगाने की कोशिश करता है
लुंड आधा खड़ा होने की वजह से उसका मुँह ऊपर की तरफ था और बॉटल आधी शॉर्ट्स से निकली हुई थी
सोनू लुंड का मुँह बॉटल के मुँह पर चुपका कर मूतने लगा | पिस्सस करते हुए बॉटल में पीला दर्व्य भरने लगा
मधु की आँखों के सामने 10-15 सेकंड बॉटल आधी भर गयी | ऐसा नजारा मधु ने आजतक ना देखा था
पर सोनू अभी रुका नहीं था , वो बॉटल को भरता जा रहा था , कुछ ही देर में बॉटल करीब करीब भर गयी और
बस ओवरफ्लो होने ही वाली थी , की मधु चिल्ला पड़ी
मधु - ओफ़्फ़्फ़ ....रुक जा देख नहीं रहा भर गयी है |
सोनू - मम्मी जल्दी दूसरी लेके आओ नहीं तो मेरा पेंट में निकल जायेगा
मधु - दूसरी नहीं है पगले मैंने कल ही कबाड़ी वाले को सब बॉटल दे दी
ला मुझे दे दे ये भरी हुए बॉटल में खली करके लाती हु
सोनू ने बॉटल संभाल के शॉर्ट्स में से निकली और मधु के हाथ में पकड़ा दी
बॉटल बहुत गरम थी और सोनू के मूत से लबालब भरी हुई | मधु ने थोड़ी नाक भो सिकोड़ी और बॉटल लेके बाथरूम में चली गयी
मधु - ले खली कर दी मैंने , लगा ले अपने नल पर वापिस
सोनू ने बहुत प्रेशर से रोक के राखी थी पेशाब बॉटल लगते ही फिर भरना शुरू कर दिया
देखते ही देखते बॉटल फिर आधी भर गयी | मधु हैरान थी ये लड़का कितना बाथरूम करता है |
खैर मधु फिर बॉटल को खली करके ले आयी |
मधु - अब सोने की कोशिश कर सोनू बेटा |
सोनू - हाँ मम्मी | थैंक यू मम्मी !!
मधु सोनू के सर पर किस करके उसके सर पर हाथ फेरते हुए उसे सुलाने की कोशिश करती है |
---------------------------------------------------------
दोस्तों अगर आपको मेरे ये कहानी का पहला भाग रोमांचक लगा तो मुझे जरुर लिखियेगा |
silver.feather83@gmail.com

No comments:
Post a Comment